उड़ीसा की जनजातियाँ-

 

उड़ीसा (ओडिशा) की जनजातियाँ

ओडिशा भारत के उन राज्यों में से एक है, जहाँ जनजातीय आबादी काफी अधिक है। यहाँ की जनजातियाँ अपनी अनूठी संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली के लिए जानी जाती हैं। राज्य की लगभग 22.85% जनसंख्या जनजातीय समुदाय से आती है।

मुख्य जनजातियाँ और उनकी विशेषताएँ

1. गोंड जनजाति

  • यह ओडिशा की सबसे बड़ी जनजातियों में से एक है।
  • मुख्य रूप से कंधमाल, कालाहांडी, और कोरापुट जिलों में पाई जाती है।
  • कृषि और वनों से उत्पादित चीज़ों पर निर्भर रहती है।
  • गोंड जनजाति में "गोटुल" (युवा आश्रम) परंपरा काफी प्रसिद्ध है।

2. संथाल जनजाति

  • ये मुख्य रूप से मयूरभंज, क्योंझर और बालासोर जिलों में रहती है।
  • खेती, शिकार और मछली पकड़ने का काम करती है।
  • इनका पारंपरिक नृत्य और संगीत बहुत प्रसिद्ध है।

3. जुआंग जनजाति

  • उड़ीसा की एक प्राचीन जनजाति जो मुख्य रूप से केन्दुझार और ढेंकानाल जिलों में रहती है।
  • वन्य उत्पादों पर निर्भर होती है और झूम खेती (शिफ्टिंग एग्रीकल्चर) करती है।
  • पारंपरिक आभूषण पहनने की परंपरा है।

4. भूमिज जनजाति

  • मुख्य रूप से मयूरभंज और क्योंझर जिलों में पाई जाती है।
  • खेती और पशुपालन इनकी आजीविका का प्रमुख साधन है।

5. सौर जनजाति

  • यह ओडिशा की एक विशेष और पौराणिक जनजाति है, जो गजपति, कंधमाल और रायगडा जिलों में रहती है।
  • सौर जनजाति की चित्रलिपि (इडियोग्राफिक राइटिंग) बहुत प्रसिद्ध है।
  • ये अपने पारंपरिक नृत्य और त्योहारों के लिए भी जानी जाती है।

6. कंध (कोंध) जनजाति

  • यह ओडिशा की प्रमुख जनजातियों में से एक है, जो कंधमाल, बोलांगीर और संबलपुर जिलों में पाई जाती है।
  • ऐतिहासिक रूप से "मेरिया बलि" (मानव बलि) प्रथा के लिए जानी जाती थी, जो अब पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।
  • इनका पारंपरिक "डोंगरी" नृत्य प्रसिद्ध है।

7. भुया जनजाति

  • मुख्य रूप से सुंदरगढ़, क्योंझर और मयूरभंज जिलों में निवास करती है।
  • वन्य उत्पाद और छोटी जोत की खेती इनका मुख्य पेशा है।

8. परजा जनजाति

  • ये कोरापुट, मलकानगिरि और रायगडा जिलों में पाई जाती है।
  • झूम खेती और कारीगरी इनका मुख्य पेशा है।
  • ये अपने अनोखे पहनावे और पारंपरिक नृत्य के लिए प्रसिद्ध हैं।

9. बोंडा जनजाति (Bonda Tribe)

  • यह ओडिशा की सबसे प्राचीन और अलग-थलग रहने वाली जनजातियों में से एक है।
  • मुख्य रूप से मलकानगिरि और कोरापुट जिलों में रहती है।
  • बोंडा महिलाएँ अपने पारंपरिक आभूषणों, नग्न वक्षस्थल और मोतियों की लंबी माला पहनने के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • ये खुद को बाहरी समाज से अलग रखना पसंद करती हैं।

10. डोंगरिया कोंध जनजाति

  • यह जनजाति नियामगिरि पहाड़ियों (कालाहांडी और रायगडा जिलों) में रहती है।
  • कृषि और वनों पर निर्भर रहती है।
  • इन्होंने नियामगिरि पहाड़ियों में बॉक्साइट खनन के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया था।

ओडिशा की जनजातियों की संस्कृति और परंपराएँ

  • नृत्य और संगीत – सौर, कंध और संथाल जनजातियों के पारंपरिक नृत्य बहुत प्रसिद्ध हैं।
  • पहनावा और गहने-    बोंडा महिलाएँ छोटे वस्त्र (रिंगा) और मोतियों की लंबी मालाएँ पहनती हैं।
      कोंध और गोंड महिलाएँ चांदी के भारी गहने और नाक की बाली               (नथुनी) पहनती हैं।

         संथाल पुरुष और महिलाएँ हाथ से बुनी हुई साड़ी और धोती                 पहनते हैं।


धर्म और आस्था

  • अधिकांश आदिवासी प्रकृति पूजा करते हैं। 
  • सूर्य, चंद्रमा, पहाड़, नदियों  जंगलों और अपने पूर्वजोंकी पूजा की जाती है।
  • इनके पारंपरिक धर्मों में "सारना" और "धरनी पेन" जैसे रीति-रिवाज महत्वपूर्ण हैं।
  • भाषा – संथाली, कुड़ुख, गोंडी, और डोंगरिया जैसी भाषाएँ प्रचलित हैं।


आजीविका

कृषि और झूम खेती – मुख्य रूप से आदिवासी खेती और जंगल से मिलने वाले उत्पादों पर निर्भर करते हैं।

वन उत्पाद संग्रह – महुआ, तेंदू पत्ता, साल के बीज, और शहद जैसे वन उत्पादों का संग्रह करते हैं।

हस्तशिल्प और कारीगरी – लकड़ी के शिल्प, बांस के उत्पाद, और मिट्टी के बर्तन बनाते हैं।



3. आधुनिकरण और आदिवासी जीवन पर प्रभाव

शिक्षा और रोजगार – आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा दर अभी भी कम है, लेकिन सरकार द्वारा विशेष स्कूल और छात्रवृत्तियाँ दी जा रही हैं।

संरक्षण और अधिकार – "वन अधिकार अधिनियम" (FRA) के तहत आदिवासियों को जंगलों पर अधिकार दिए जा रहे हैं।

औद्योगीकरण का प्रभाव – कई आदिवासी क्षेत्रों में खनन और औद्योगीकरण के कारण विस्थापन की समस्या बनी हुई है।

निष्कर्ष

ओडिशा की जनजातियाँ न केवल अपनी अनोखी जीवनशैली के लिए जानी जाती हैं, बल्कि उनकी पारंपरिक कला, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण की समझ भी अद्भुत है। हालांकि, आधुनिकरण और औद्योगीकरण के कारण इनकी जीवनशैली में बदलाव आ रहा है, लेकिन ये अभी भी अपनी परंपराओं को बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं।

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