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बनारस (काशी) के बारे में जाने कुछ खास बातें

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  काशी  - बनारस (काशी/वाराणसी) की विशेषताएँ:- बनारस, जिसे काशी और वाराणसी के नाम से भी जाना जाता है, भारत का सबसे प्राचीन और पवित्र शहर है। इसे 'मोक्ष की नगरी' भी कहा जाता है। यह शहर न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि सांस्कृतिक, शैक्षिक, ऐतिहासिक, और व्यावसायिक दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण केंद्र है। आइए विस्तार से इसकी विशेषताओं को समझें: 1. धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (i) काशी विश्वनाथ मंदिर यह मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह हिंदू श्रद्धालुओं के लिए अति महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। यहाँ प्रतिदिन हजारों भक्त पूजा-अर्चना करने आते हैं। (ii) गंगा नदी और घाट बनारस गंगा नदी के किनारे बसा हुआ है और इसके घाट विश्वप्रसिद्ध हैं। दशाश्वमेध घाट – यहाँ हर शाम भव्य गंगा आरती होती है। मणिकर्णिका घाट और हरिश्चंद्र घाट – यहाँ अंतिम संस्कार होते हैं, और मान्यता है कि यहाँ मरने से मोक्ष प्राप्त होता है। अस्सी घाट – यह घाट साहित्य, संगीत और संस्कृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है। (iii) मोक्ष की नगरी ऐसा माना जाता है कि यहा...

पर्यावरण के प्रति जागरूक ब्राज़ीलियाई प्रशासन

 नेमार पर यह जुर्माना  ब्राजील के मंगारतिबा शहर  में स्थित उनकी  लक्जरी हवेली  के निर्माण में पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के कारण लगाया गया। मुख्य कारण: पर्यावरणीय क्षति:  निर्माण के दौरान  मिट्टी, चट्टान और रेत का अवैध रूप से इस्तेमाल  किया गया, जिससे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचा। जल स्रोतों पर प्रभाव:  निर्माण कार्य में  ताजे पानी के स्रोतों  को अवैध रूप से मोड़ा गया। बिना अनुमति के निर्माण:  प्रशासन के अनुसार, नेमार ने इस परियोजना के लिए आवश्यक  आवश्यक परमिट नहीं लिए थे । जुर्माने की तारीख और राशि: जुलाई 2023  में यह मामला सामने आया था, जिसके बाद नेमार पर  लगभग 3.3 मिलियन डॉलर (27 करोड़ रुपये)  का जुर्माना लगाया गया। स्थानीय अधिकारियों ने निर्माण कार्य रोकने के आदेश दिए थे , लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेमार ने इसके बावजूद वहां  पार्टी आयोजित की और झील में स्नान भी किया , जिससे मामला और गंभीर हो गया। अधिकारियों की कार्रवाई: प्रशासन ने नेमार की संपत्ति की  घेराबंदी कर दी  और...

भारत में लगने वाला ऐसा मेला जहॉं चुन सकते हैं अपनी पसंद की लड़की और कर सकते हैं प्रेम विवाह

  भगोरिया मेले की शुरुआत का सटीक ऐतिहासिक वर्ष स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है, लेकिन माना जाता है कि इसकी परंपरा 500 से 700 साल पुरानी है। यह मुख्य रूप से मालवा और निमाड़ क्षेत्र में रहने वाले भील और भिलाला जनजातियों द्वारा मनाया जाता है । इतिहास और उत्पत्ति ऐसा माना जाता है कि यह मेला भील राजा भगीरथ द्वारा शुरू किया गया था, जिन्होंने इसे फसल कटाई के उत्सव के रूप में मनाना शुरू किया था। कुछ ऐतिहासिक मतों के अनुसार, इसकी परंपरा मुगलकाल से पहले की है, जब भील राजा और उनके वंशज इसे मनाते थे। यह उत्सव पहले केवल पारंपरिक मेलों के रूप में होता था, लेकिन समय के साथ यह प्रेम विवाह की परंपरा से भी जुड़ गया। भगोरिया मेला मध्य प्रदेश के मालवा और निमाड़ क्षेत्र (मुख्यतः झाबुआ, धार, बड़वानी, अलीराजपुर) में मनाया जाने वाला एक प्रसिद्ध पारंपरिक मेला है। यह होली से पहले आयोजित किया जाता है और भील तथा भावसिंह जनजातियों का महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। भगोरिया मेले की खासियतें प्रेम और विवाह का मेला: इस मेले को प्रेम और विवाह से जोड़कर देखा जाता है। यहां युवक-युवतियां पारंपरिक परिधानों में सज...

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की परीक्षा की सम्पूर्ण जानकारी

आयु सीमा (Age Limit) उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की परीक्षाओं के लिए आयु सीमा निम्नानुसार है: सामान्य श्रेणी : न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष। आरक्षित श्रेणियों के लिए आयु में छूट प्रदान की गई है: उत्तर प्रदेश के अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) : अधिकतम आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट, अर्थात् 45 वर्ष तक। उत्तर प्रदेश के दिव्यांग उम्मीदवार : अधिकतम आयु सीमा में 15 वर्ष की छूट, अर्थात् 55 वर्ष तक। उत्तर प्रदेश के भूतपूर्व सैनिक : जिन्होंने न्यूनतम 5 वर्ष की सेवा की हो, उन्हें अधिकतम आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट। उत्तर प्रदेश के राज्य सरकार के कर्मचारी, आपातकालीन कमीशंड अधिकारी, शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी : अधिकतम आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट। उत्तर प्रदेश के सूचीबद्ध खेलों के कुशल खिलाड़ी : अधिकतम आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट। अधिक जानकारी के लिए, कृपया UPPSC की आधिकारिक वेबसाइट या नवीनतम अधिसूचनाओं की जाँच करें। राष्ट्रीयता (Nationality)- उम्मीदवार को भारत का नागरिक होना चाहिए। नेपाल, भूटान या तिब्बत से आए शरणार्थी जो भारत म...

एम.पी. के आदिवासी समुदाय

  मध्य प्रदेश भारत का एक ऐसा राज्य है जहाँ बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय रहते हैं। यहाँ की जनसंख्या का लगभग 21% आदिवासी है, जो इसे देश के सबसे अधिक आदिवासी आबादी वाले राज्यों में से एक बनाता है। मध्य प्रदेश को "भारत का हृदय" कहा जाता है, और इसकी आदिवासी संस्कृति, परंपराएँ और लोककला इसे और भी समृद्ध बनाती हैं। मुख्य आदिवासी समुदाय मध्य प्रदेश में कई प्रमुख आदिवासी समुदाय निवास करते हैं, जिनमें मुख्य रूप से ये शामिल हैं: गोंड – यह मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा आदिवासी समुदाय है और इनकी संस्कृति बहुत ही समृद्ध है। गोंड जनजाति की अपनी भाषा "गोंडी" होती है, और यह मुख्य रूप से छिंदवाड़ा, मंडला, बालाघाट, सिवनी और डिंडोरी जिलों में पाई जाती है। भील – यह दूसरा सबसे बड़ा आदिवासी समुदाय है, जो धार, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी और रतलाम जिलों में मुख्य रूप से रहता है। भील जनजाति को उनके तीरंदाजी कौशल के लिए जाना जाता है। बैगा – यह एक विशेष जनजाति मानी जाती है और जंगलों में रहने वाले बैगा लोग मुख्य रूप से मंडला, डिंडोरी और बालाघाट जिलों में पाए जाते हैं। ये झूम खेती और पारंपर...

उड़ीसा की जनजातियाँ-

  उड़ीसा (ओडिशा) की जनजातियाँ ओडिशा भारत के उन राज्यों में से एक है, जहाँ जनजातीय आबादी काफी अधिक है। यहाँ की जनजातियाँ अपनी अनूठी संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली के लिए जानी जाती हैं। राज्य की लगभग 22.85% जनसंख्या जनजातीय समुदाय से आती है। मुख्य जनजातियाँ और उनकी विशेषताएँ 1. गोंड जनजाति यह ओडिशा की सबसे बड़ी जनजातियों में से एक है। मुख्य रूप से कंधमाल, कालाहांडी, और कोरापुट जिलों में पाई जाती है। कृषि और वनों से उत्पादित चीज़ों पर निर्भर रहती है। गोंड जनजाति में "गोटुल" (युवा आश्रम) परंपरा काफी प्रसिद्ध है। 2. संथाल जनजाति ये मुख्य रूप से मयूरभंज, क्योंझर और बालासोर जिलों में रहती है। खेती, शिकार और मछली पकड़ने का काम करती है। इनका पारंपरिक नृत्य और संगीत बहुत प्रसिद्ध है। 3. जुआंग जनजाति उड़ीसा की एक प्राचीन जनजाति जो मुख्य रूप से केन्दुझार और ढेंकानाल जिलों में रहती है। वन्य उत्पादों पर निर्भर होती है और झूम खेती (शिफ्टिंग एग्रीकल्चर) करती है। पारंपरिक आभूषण पहनने की परंपरा है। 4. भूमिज जनजाति मुख्य रूप से मयूरभंज और क्योंझर जिलों में पाई जाती ...

सबसे अधिक पैसा देने वाली सब्जी की खेती

  उत्तर प्रदेश में ऐसी सब्जियों की खेती से सबसे अधिक पैसा कमाया जा सकता है जिनकी बाजार में मांग अधिक हो, जिनका उत्पादन जल्दी हो, और जो कम खर्च में अधिक मुनाफा दें। यहाँ कुछ सबसे अधिक मुनाफा देने वाली सब्जियों की सूची दी गई है: 1. टमाटर की खेती टमाटर की मांग पूरे साल रहती है। हाइब्रिड किस्मों से प्रति बीघा 100-150 क्विंटल तक उत्पादन संभव है। प्रोसेसिंग कंपनियों (सॉस, केचप) से सीधा कॉन्ट्रैक्ट कर अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। 2. शिमला मिर्च की खेती हाइब्रिड और रंगीन शिमला मिर्च (ग्रीन, येलो, रेड) की कीमत सामान्य मिर्च से 2-3 गुना अधिक होती है। पॉलीहाउस में उगाने से प्रति बीघा लाखों रुपये की कमाई हो सकती है। 3. मिर्च की खेती हरी मिर्च और लाल मिर्च दोनों की बाजार में बहुत मांग है। कम समय में अधिक उत्पादन मिलता है, और सूखाकर बेचने पर ज्यादा कीमत मिलती है। प्रोसेसिंग और मसाला उद्योग के लिए कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग का भी विकल्प है। 4. फूलगोभी और बंदगोभी की खेती ये सब्जियां रबी और खरीफ दोनों मौसम में उगाई जा सकती हैं। शादी-विवाह के मौसम में इनकी कीमत अधिक होती है। औसतन प...